child labour

                           बाल मजदूरी 


बाल श्रम हमारे देश और समाज के लिए बहुत ही गम्भीर विषय है। आज समय आ गया है कि हमें इस विषय पर बात करने के साथ-साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियाँ भी समझनी होगी। बाल मज़दूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना हमारे देश के लिए आज एक चुनौती बन चुका है क्योंकि बच्चों के माता-पिता ही बच्चों से कार्य करवाने लगे है। आज हमारे देश में किसी बच्चे को कठिन कार्य करते हुए देखना आम बात हो गई है।

बाल मज़दूरी को बड़े लोगों और माफियाओं ने व्यापार बना लिया है। जिसके कारण दिन-प्रतिदिन हमारे देश में बाल श्रम बढ़ता जा रहा है और बच्चों का बचपन खराब हो रहा है। इस से बच्चों का भविष्य तो खराब होता ही है, साथ में देश में गरीबी फैलती है और देश के विकास में बाधाएँ आती हैं।




बाल श्रम भारत के साथ-साथ सभी देशों में गैर कानूनी है। बाल श्रम हमारे समाज के लिए एक कलंक बन चुका है। बाल मज़दूरी की समस्या समय के साथ-साथ बहुत उग्र रूप लेती जा रही है। इस समस्या को अगर समय रहते जड़ से मिटाया नहीं गया, तो इससे पूरे देश का भविष्य संकट में आ सकता है।
 

बाल श्रम या बाल मज़दूरी का अर्थ


जब कोई बच्चे को उसके बाल्यकाल से वंचित कर उन्हें मज़बूरी में काम करने के लिए विवश करते हैं, उसे बाल श्रम कहते हैं। बच्चों को उनके परिवार से दूर रखकर उन्हें गुलामों की तरह पेश किया जाता है।
दूसरे शब्दों में - किसी भी बच्चे के बाल्य-काल के दौरान पैसों या अन्य किसी भी लालच के बदले में करवाया गया किसी भी तरह के काम को बाल श्रम कहा जाता है। इस प्रकार की मज़दूरी अधिकतर पैसों या ज़रूरतों के बदले काम करवाया जाता है।



साधारण शब्दों में समझाया जाए तो जो बच्चे 14 वर्ष से कम आयु के होते हैं, उनसे उनका बचपन, खेल-कूद, शिक्षा का अधिकार छीनकर, उन्हें काम में लगाकर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित कर, कम रुपयों में काम करा कर शोषण करके, उनके बचपन को श्रमिक रूप में बदल देना ही बाल श्रम कहलाता है।

बाल श्रम पूर्ण रूप से गैर कानूनी है। इस प्रकार की मज़दूरी को समाज में हर वर्ग द्वारा निंदित भी किया जाता है। भारत के संविधान 1950 के 24 वें अनुच्छेद के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मज़दूरी, कारखानों, होटलों, ढाबों, घरेलू नौकर इत्यादि के रूप में कार्य करवाना बाल श्रम के अंतर्गत आता है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है, तो उसके लिए उचित दंड का प्रावधान है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत में 35 मिलियन से भी ज्यादा बच्चे बाल मज़दूरी करते हैं। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान में बाल मज़दूरी होती है।
 


(i) जीवन का सबसे अच्छा पल बचपन ही होता है जब हम बच्चे होते हैं तो हमें किसी भी बात की चिंता नहीं रहती है। हम खिलौने से खेलते हैं और सभी लोग हमें प्यार करते हैं साथ ही हम जो चाहे पढ़ सकते हैं। लेकिन जिन बच्चों को बाल मज़दूरी के काम में लगा दिया जाता है वह कभी भी खेल नहीं पाते हैं और अपना मनचाहा काम नहीं कर पाते है। जिसके कारण उनका पूरा बचपन मज़दूरी के काम करने में बीत जाता है।

(ii) बाल मज़दूरी करने वाले बच्चे अक्सर कुपोषण का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उनके मालिक उनसे काम तो ज्यादा करवाते है लेकिन उन्हें खाने को कुछ भी नहीं देते। जिसके कारण उनके शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है और वे धीरे-धीरे कुपोषण के शिकार हो जाते है।
(iii) बाल मज़दूरी करते समय कई बच्चे और बच्चियों का शारीरिक शोषण भी किया जाता है जोकि उनके ऊपर दोहरी मार है। एक रिपोर्ट के अनुसार बाल मज़दूरी करने वाले बच्चों में से लगभग 40% बच्चों का शारीरिक शोषण किया जाता है। यह बहुत ही गंभीर बात है लेकिन इस पर कभी भी ध्यान नहीं दिया जाता।

(iv) मज़दूरी करते समय बच्चों से अक्सर गलतियाँ होती रहती हैं।  गलतियाँ तो बड़े लोगों से भी होती है लेकिन बच्चों को डाँट लगाना आसान होता है इसलिए उन से काम कराने वाले उनके मालिक उन्हें मानसिक प्रताड़ना देते है। जो कि एक छोटे से बच्चे के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालती है।
(v) बच्चों के माता-पिता बचपन में तो कुछ रुपयों के लिए अपने बच्चों को मज़दूरी पर लगा देते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि अगर वे पढ़ेंगे लिखेंगे नहीं तो उन्हें नौकरी नहीं मिल पाएगी और वे पूरी जिंदगी भर मज़दूरी करनी पड़ेगी। जिसके कारण उनका पूरा जीवन गरीबी में बीतेगा।
(vi) ज्यादातर गरीब परिवार के बच्चे पढ़ लिख नहीं पाते हैं, इसी कारण वे अच्छी नौकरी नहीं कर पाते और देश के विकास में सहयोग नहीं कर पाते इसलिए देश का आर्थिक विकास भी धीमा पड़ जाता है।
(vii) जहाँ पर बच्चों से मज़दूरी कराई जाती है, वहाँ के लोग अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। साथ ही उनका रहन-सहन भी अच्छा नहीं होता है। जिसके कारण बच्चे भी उन्हीं के साथ रहने के कारण उनकी भाषा और उन्हीं के जैसा रहन-सहन करने लग जाते हैं और उनकी मानसिक स्थिति भी कमजोर हो जाती है जिसके कारण एक अच्छे समाज का विकास नहीं हो पाता है।



बाल मज़दूरी हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या है, अगर जल्द ही इसे खत्म नहीं किया गया तो यह हमारे देश के विकास में बाधक सिद्ध होगा। साथ ही जिन बच्चों को बचपन में हँसना, खेलना और पढ़ाई करना चाहिए वह बच्चे हमें अधिक मात्रा में कठिन परिश्रम करते हुए मिलेंगे जिससे हमारा देश का भविष्य खराब हो जाएगा।
इसलिए हमें आज ही बाल श्रम के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए और जहाँ पर भी कोई बच्चा हमें बाल मज़दूरी करते हुए मिले उसकी शिकायत हमें नज़दीकी पुलिस स्टेशन में करनी चाहिए। बालश्रम को खत्म करना केवल सरकार का ही कर्तव्य नहीं है, हमारा भी कर्तव्य है।

बालश्रम एक बहुत बड़ी सामाजिक समस्या है। इस समस्या को सभी के द्वारा जल्द-से-जल्द खत्म करने की जरूरत है। अगर जल्द ही इस समस्या पर कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह पूरे देश को दीमक की तरह खोखला कर देगी। बच्चे ही हमारे देश का भविष्य है
अगर उन्हीं का बचपन अंधेरे और बाल श्रम में बीतेगा तो हम एक सुदृढ़ भारत की कल्पना कैसे कर सकते है। अगर हमें नए भारत का निर्माण करना है तो बाल मज़दूरी को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा यह सिर्फ हमारे और सरकार के सहयोग से ही संभव है।



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