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किसान आंदोलन
सरकार और किसानों के बीच सुलह का रास्ता क्या है?
ये एक ऐसा सवाल है जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी के बड़े-बड़े नेता जूझ रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से वो वीडियो भी साझा किया जिसमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर किसानों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते दिख रहे हैं.
लेकिन, इन कोशिशों के बावजूद केंद्र सरकार किसान संगठनों के रुख़ में बदलाव नहीं ला पा रही है.
कितना लंबा चल सकता है किसान-सरकार संघर्ष
भारत सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष अपने रुख़ में बदलाव करने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं.
किसान तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और सरकार ने अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वह तीनों क़ानूनों को रद्द करने की मांग को स्वीकार करेगी.
ऐसे में प्रश्न उठता है कि आख़िर ये संघर्ष कब तक चलता रहेगा. क्योंकि गिरते तापमान और कोरोना के ख़तरे को देखते हुए प्रदर्शनकारियों के लिए आगे के दिन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं.
किरती किसान संघ के नेता राजिंदर सिंह ने इन क़ानूनों को कोरोनो से ख़तरनाक़ करार देते हुए प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है.
बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “किसान संगठनों के बीच किसी तरह से बीच का रास्ता निकालने की बात नहीं हो रही है और हमें मौसम की परवाह नहीं है. जहां तक रही कोरोना की बात तो ये क़ानून कोरोना से ज़्यादा ख़तरनाक हैं. हम कोरोना को झेल लेंगे लेकिन इन क़ानूनों को नहीं झेल सकते हैं और इन्हें निरस्त कराने के लिए लड़ाई निरंतर जारी रहेगी. सभी एकमत हैं, सभी एकजुट हैं.”
वहीं, सियासी हलकों में ये बात भी हो रही है कि अब किसान संगठनों का रुख नरम पड़ता दिख रहा है.
इस पर राजिंदर सिंह ने कहा, “इस तरह की ख़बरें निराधार हैं. हम अभी भी अपनी माँगों पर डटे हुए हैं. हम सभी अखिल भारतीय संगठनों ने सरकार के संशोधन प्रस्ताव को एकमत से ख़ारिज कर दिया है. हमारी माँगे अभी भी वही बनी हुई हैं कि तीनों क़ानूनों को रद्द किया जाए और एमएसपी को क़ानूनी अधिकारी बनाया जाए. हमारी यही माँगे हैं और सभी संगठन इन माँगों पर कायम हैं. हम अब संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर तेज करने जा रहे हैं.”
(किरती किसान संघ विरोध कर रहे सभी किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है. )



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